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"Abide with me" से "अ मेरे वतन के लोगों"

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देश में गणतंत्र दिवस हर वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है, ये तो सभी को पता है लेकिन क्या आप जानते है हर वर्ष मनाए जाने वाले गणतंत्र दिवस पर आप भारत के किसी गाने की धुन की बजाय स्कॉटलैंड की धुन सुनते है। जिसका नाम है "Abide with me" जिसका अर्थ है "हे प्रभु! तुम मेरे साथ रहो( दो)"और इस बीटिंग रिट्रीट को अब केंद्र सरकार ने हटाकर देशभक्ति और देशप्रेम का गाना जिसे शायद सभी भारतीयों ने सुना होगा "अ मेरे वतन के लोगों को" बीटिंग रिट्रीट में शामिल किया है।  वहीं इस स्कॉटलैंड धुन को "गांधी जी" की पंसदीदा धुन होने की वजह से बीटिंग रिट्रीट में शामिल होने की बात भी कहीं जाती थी।लेकिन Zee news के संपादक "सुधीर चौधरी" ने अपने शो DNA के माध्यम से बताया कि कहीं भी पुराने दस्तावेजों या पुस्तकों में इस बात का जिक्र नहीं कि ये "महात्मा गांधी की पसंदीदा धुन थी।उन्होनें इस धुन को सुना जरूर था लेकिन ये उनकी पसंदीदा धुन नहीं थी लेकिन उनकी मृत्यु के बाद ऐसा कहा जाने लगा की ये उनकी पसंदीदा धुन थी और इसे गणतंत्र दिवस पर बजाया जाने लगा था।

सिक्का और आदमी...

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एक सिक्के के दो पहलू होते है और सबने जीवन में बहुत बार सुना भी होगा।वैसे ही इंसान के भी दो पहलू होते है।एक वो जो आपको दिखाई देता है,आपके साथ या दूसरों के साथ जो व्यवहार होता है अथवा जो वो आपको दिखाते है या दिखाना चाहते है।लेकिन इसके उलट एक सिक्के की भांति एक दूसरा पहलू भी होता हैं और उससे आप अनभिज्ञ होते है या वो आपको कभी या अचानक या ये भी हो सकता है कि किसी कारणवश या किसी परिस्थिति में आपको दिख जाए। शायद तब आश्चर्य होगा या फिर नहीं भी। लेकिन यह कोई नई बात नहीं है जरूरी नहीं जो इंसान जैसा दिखता है वैसा हो या फिर हो सकता है आप उसे जैसा देखते है असल में वो वैसा ना हो या फिर आपको ही कुछ गलत लगा हो या वो हर परिस्थिति के अनुसार खुद को ढाल लेता या बदल लेता हो।ये शायद हम,हमारा करीबी,सगे-संबंधी या खुद भी होते है तो दूसरों का तो हम खुद भी अंदाजा लगा सकते है। जैसे अगर कोई अधिकारी अपने परिवार के साथ अलग है लेकिन वहीं किसी भी विषय से जुड़ा अधिकारी अपने काम के समय (अपने पेशे में) अलग होता है।वहीं एक लुटेरा दूसरों को लूट सकता है लेकिन घरवालों को नहीं। इसीलिए किसी का सिक्का होना परिस्थिति की मांग या ...

राजदार...

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बचपन,जवानी और वृद्धावस्था हर अवस्था के दौरान ढेरों मोड़ लगभग सभी की जिंदगी में आते है और उस दौरान कई अच्छी और बुरी यादें उसकी जिंदगी की किताब में पन्ने बनकर जुड़ती चली जाती है।कुछ ऐसी यादें और बातें होती है जो हमारे खास दोस्त या यूं कहे की अपने जिंदगी के अहम शख्स के साथ साझा करते है जिस पर आपको ताउम्र अपने से ज्यादा भरोसा रहेगा। लेकिन इसी बीच कोई नया किस्सा जिंदगी की कहानी में जुड़ जाता है जिसका राजदार कोई होता है तो वो है बिस्तर। जिस पर दिनभर की थकान,मुस्कान, खुशी-गम और ना जाने कितने ही ऐसे किस्सों का सीक्रेट पार्टनर बन जाता है जो सिर्फ आप और वहीं जानता है और अंत में तसल्ली देकर आपको कुछ पल अपने लिए सुकून की तरफ बढ़ा देता है...

कलंक नहीं प्रेम है काजल...

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गाने के ये चंद शब्द एक तरफ निश्छल प्रेम को बयां कर रहें हैं... तो दूसरी और प्रेम को लेकर समाज की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाते हुए प्रेम का सही अर्थ और महत्त्व समझाने का प्रयास कर रहें है...समाज में प्रेम को उस दाग की तरह देखा जाता है जिसे लोग कलंक का नाम दे देते है...असल में प्रेम तो वो खूबसूरत एहसास है जो अपने आप में ही पूर्ण है...जो एक कलंक नहीं बल्कि वो काजल है जो उसे हर बुरी नजर से सुरक्षित रखता है...प्रेम वो है जो एक मां को अपने बच्चे से है, प्रेम वो है जो पिता को अपनी संतान से है, प्रेम वो है जो राधा को कृष्णा से है...बिना किसी शर्त के बिना किसी स्वार्थ के किसी उसके सुख - दुख को अपनाना, उसकी खुशी से खुश,उसके गम से दुख, अपने से ज्यादा उसको महत्त्व देना ही प्रेम है...और एक मां, पिता ,राधा - कृष्णा से अच्छा उदाहरण क्या हो सकता है... किसी की अच्छे की कामना करना,उसको देख कर खुश रहना मात्र लगाव है ...जो आज है तो शायद कल ना हो...एहसास तो बदलते रहते है...लेकिन नहीं बदलता तो प्रेम...जो अमिट और अमर हैं...

तस्वीरें बोलती हैं...

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  दिल जो हर किसी के पास है अपने दिल का ख़्याल जमाने को है  उस ज़माने का दिल कहीं ना कहीं थोड़ा या कम सही मतलबी है लेकिन इस दिल में कुछ ऐसा है जो शायद ज़माने में किसी इंसान के पास नहीं है ये दिल हर इंसान को जीने की ताकत देता है...खूबसूरती को परखने की चाह देता है...ये वो है जो बिना किसी स्वार्थ के जीने के लिए सांसे देता है...जिसके बिना अस्तित्व ही संभव नहीं और स्वार्थी मानव धड़कता दिल लिए भी दूसरे दिल की सांसे रोक देता है...वो इंसान जब उसे तबाह करने जा रहा होता है वो तब भी अपना फर्ज निभाता है...अपने आखिरी दम तक उसे ही प्राणवायु दे जाता है...दिल वाला होकर भी दूसरे दिल को धड़कने से मनुष्य रोकता है...बेजुबान रोते हुए कहता "मेरा स्वार्थ नहीं साथी... मैं अब भी तुम्हारा लिए सोच रहा हूं... हमें इसी तरह बर्बाद करके तुम अपने को ही नुकसान पहुंचा रहे हो...एक दिन मेरे जैसे सबको तुमने काट डाला...तो पृथ्वी ही खत्म हो जाएगी...और ये जो तबाही आज देख रहे हो कुदरत की सब तुम्हारी खिलवाड़ का ही परिणाम है" अंत समय में भी देकर शिक्षा वो आंखें मूंद जाता है...और पागल इंसा अपनी जीत का जश्न मनाता है... प...

अब दोबारा ना आना इस देश मेरी लाडो...

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कवि की कविता राजनेता की राजनीति  न्यूज चैनल का एक और मुद्दा,एक ब्रेकिंग खबर लेकिन,  किसी की न सिर्फ जिस्म की बल्कि रूह की भी हत्या... मानवता ने तो शर्मशार होना कबका छोड़ ही रखा है... देश में और एक निर्भया ने मुंबई में आज इस दुनिया से मुंह मोड़ लिया...एक दरिंदे की हवस से आज उसने आंखें मूंद ली... और समाज में बैठे आदमी रूपी भेड़िए आज भी खुले घूम रहे है...सिर्फ आज ही नहीं ये हर रोज घूमते है...देश में हर 16 मिनट में रेप होता है...ये तो सिर्फ वो है जिनका पता चल जाता है...लेकिन ना जाने कितनी ऐसी घटनाएं होती है जो दबकर रह जाती है...लेकिन हमारा समाज औरत पर तो उंगली उठा सकता है पर रेप पर एकत्रित नहीं हो सकता...और क्या ऐसा देश सच में आजाद है जहां महिला सुरक्षा बड़ा प्रश्नचिन्ह हैं...ये मंदिर में जाकर देवी को पूज सकते है...लेकिन औरत पर अत्याचार नहीं छोड़ सकते ...छोटे कपड़े पहनने पर सवाल उठा सकते है...तब जहन में एक ही सवाल आता है जब बच्चियों के साथ बुजुर्ग के साथ रेप होता है...तो क्या इसके लिए भी कपड़े ही जिम्मेदार होंगे...?किस कोने में महिला को डर नहीं है...अस्पताल में डॉक्टर,मंदिर में पु...

कैसे कह दूं आजाद है मेरा देश

कैसे कह दूं आजाद है मेरा देश  पल पल मैंने गुलामी को देखा है  कभी लड़की होने के हवाले से  तो कभी दरिंदो के डर को झेला है  देर रात की मौज मस्ती  तो मेरा भी दिल लुभा जाती है  देख अकेले राहों को  पर मेरी नजरें घबरा जाती है  चंचल जरा सी हूं मैं  पर दुनिया से भी डरती हूं  मेरी छोटी छोटी खुशियों की कीमत  मेरे मां बाप की इज्जत से जोड़ने से डरती हूं  वैसे तो बड़ी निडर हूं मैं  पर अक्सर सहम जाती हूं  घर तक सुरक्षित नहीं आज बच्चियों के लिए  इस बात से हड़बड़ा जाती हूं  आजादी का ये दिन बताओ  मैं कैसे फिर बतला जाऊं  बिना कुसूर खूबसूरत जिंदगी लुटा देने वाली  नन्ही परियों को वापिस कहां से लाऊं...